रोहिणी में इस पहल की शुरुआत छोटे स्तर पर की गई है, लेकिन आयोजकों का कहना है कि इसे धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र तक बढ़ाया जाएगा।
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पर आने वाला ख़र्च उपलब्ध संसाधनों से पूरा किया जाएगा और काम की नियमित निगरानी होगी।
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