भारत में इस मुद्दे पर लंबे समय से चर्चा हो रही थी। अब इसे लेकर कुछ व्यावहारिक कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है।
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इस पर आने वाला ख़र्च उपलब्ध संसाधनों से पूरा किया जाएगा और काम की नियमित निगरानी होगी।
एक स्थानीय शिक्षक ने कहा, “युवाओं की भागीदारी इसमें सबसे अहम है, और यही आगे बदलाव लाएगी।”
इसके साथ ही आसपास के इलाक़ों में भी इसी तरह के कदमों पर विचार चल रहा है।
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